अन्तर्वार्ता : लोकतान्त्रिक गणतन्त्र विश्वेक उत्कृष्ट व्यवस्था अइछ– प्रथम राष्ट्रपति डा. यादव


पाटन (ललितपुर), १५ जेठ : नेपाली जनताद्वारा कएल गेल सात दशक लम्बा संघर्ष आ २०६२/६३ क जनआन्दोलनक बलमे २०६५ जेठ १५ गते बैसल ऐतिहासिक संविधानसभाक पहिल बैसारसँ नेपाल संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रक घोषणा भेल । तकर बाद २०६५ साओन ६ गते डा. रामवरण यादव गणतन्त्र नेपालक प्रथम राष्ट्रपतिमे निर्वाचित भेलाह । गणतन्त्रक घोषणा आ राष्ट्रपति संस्थाक स्थापना सङे संघीय प्रणालीक शासन व्यवस्था कार्यान्वयन होइत गेल, प्रथम राष्ट्रपति डा. यादवके हाथसँ २०७२ आसिन ३ गते संविधानसभाद्वारा नेपालक संविधान जारी भेलाक बाद संघीय लोकतान्त्रिक गणतान्त्रिक प्रणाली संस्थागत भेल । गणतन्त्रक घोषणा भेल दिनके स्मरणमे आइ १९ अम गणतन्त्र दिवस मनाएल जा रहल अइछ । प्रस्तुत अइछ, गणतन्त्र प्राप्तिक १८ साल पूरा भ क १९म गणतन्त्र मनाएल जा रहल सन्दर्भमे गणतन्त्र नेपालक प्रथम राष्ट्रपति डा. यादव सङ्गे राष्ट्रिय समाचार समिति (रासस)क समाचारदाता माधवप्रसाद घिमिरेद्वारा कएल संवादक सम्पादित अंश :

संघर्षक मैदानसँ गणतन्त्र नेपालक प्रथम राष्ट्रपतिक जिमेवारी सफलतापूर्वक वहन क एतधैर पहुँचलापर केहन अनुभूति भ रहल अइछ ?

वि.सं. २००७मे प्राप्त भेल प्रजातन्त्र विरुद्ध २०१७ सालमे प्रतिगमन भेल । ओइ समय हमसभ विद्यार्थी आन्दोलनसँ संघर्षमे लागलौँ, २०३६, २०४६, २०६२/६३ सालक जनआन्दोलन बाद जे प्रणालीसँ लोकतन्त्रक पुनःवहाली भेल, तकर बाद भेल परिवर्तनक जगमे हमरा गणतन्त्र नेपालक प्रथम राष्ट्रपति होएबाक अवसर मिलल । देशमे जे संविधान छै, ओ संस्थागत होइत जाए । देशके नीक होइत जाए । तीन करोड़ नेपालीक समृद्धिक मात्रामे सफलता मिलए से कामना करैत छी ।

नेपालमे गणतन्त्रक आवश्यकताकेँ कोना देखैत छी ?

ओहि समय जे राजसंस्था छल, बारम्बार संविधानकेँ कुचैत अपन स्वेच्छाचारी शासन क रहल छल । २०१७ सालमे, २०५९ सालमे संविधानक मर्मकेँ लतमिदर्न क जनताक भावना विपरीत शासनसत्ता हाथमे लेबाक काज भेल, अइसँ राजतन्त्र जनताक अधिकारकेँ संरक्षण करत, लोकतन्त्रक रक्षा करत से जनताकेँ विश्वास नै भेल । बारम्बार जनताक अधिकारपर आक्रमण करैत छै, जनताक अपेक्षाकेँ सम्मान नै करैत छै से लागल । ताहि लेल राजतन्त्र फेक क गणतन्त्रक स्थापना करबाक लेल जनतासभ बलिदान देलैन, आन्दोलन आ संघर्ष केलैन, गणतन्त्रक स्थापना केलैन । अपन देशक पुरान इतिहास मोन पारब तँ राणाकाल, शाहकालमे हुकुमी शासनक व्यवस्था छलै, अहाँसभकेँ सेहो जानैत छी , ओइ दिनसभमे शासन चलेनिहारसभ जनताक अधिकार अपन मुट्ठीमे राखने छल आ जनता अपन अधिकारक लेल संघर्ष करए पड़ैत छल। २००७ सालक संघर्ष तकरे उपज छै, ओइ संघर्ष बाद जनता अपन अधिकार स्थापित केलक । २०१७ सालमे राजा जनताक अधिकार छीन लेलक, फेर राजासँ छीनल गेल अधिकार फिर्ता करबाक लेल जनताकेँ लम्बा समय संघर्ष करए पड़ल, ३० सालक संघर्षसँ २०४६ सालमे जनता अपन अधिकार पएलक मुदा फेर २०५९ सालमे राजा फेरो तहिना केलैन, जनता राजनीतिक दलसभ मिइल क संघर्ष केलक, अपन अधिकार स्थापित केलक ।

गणतन्त्र जनता आ देशकेँ की देलक से कि लगैत अइछ अपनेकेँ ?

गणतन्त्र जनताकेँ देशक मालिक बनेलक, जनता स्वयं देशक मालिक छैथ । जनताक अधिकार जनतामे गेल, जनताद्वारा स्थापित प्रणालीमे गणतन्त्र अइछ, दूटा संविधानसभासँ संविधान बना क हमसभ जनताकेँ अर्पण कएलाैँ, ओइ संविधान अनुसार देशमे लोकतान्त्रिक पद्धति छै, संघीयता, समावेशी, विधिक शासनक व्यवस्था छै, जनताद्वारा, जनताक सहभागितामे, जनताक लेल सञ्चालन कएल जाएबला वैधानिक शासन व्यवस्था अइछ, आवधिक निर्वाचन आ जनता अपन प्रतिनिधि स्वयं चयन करबाक व्यवस्था छै, जनता सार्वभौम भेलाह, जनताद्वारा चुनल गेल शासन व्यवस्था छियै, लोकतन्त्रक सैद्धान्तिक आधार छै, जनताद्वारा चुनल गेल प्रतिनिधिसभा छै, जनताक प्रतिनिधि सरकार बनबैत छै, सरकार जनताक भावना अनुसार आ प्रतिनिधिसभाक निर्णय अनुसार देशक व्यवस्था चलबैत अइछ, जनताक हितमे सरकार होइत अइछ, ई संसारके उन्नत व्यवस्था अइछ ।

संविधान जारी करैत काल संविधानकेँ प्रणाम कएने छलौँ अपने, से कोना सोच आएल ?

हम संविधान घोषणा करबाक समय हस्ताक्षर करैत जनताके आगाँ लोकतन्त्रक मन्दिरसँ जनताकेँ जे द रहल छलाैँ, ओ तँ बहुते महत्वपूर्ण छल । किए तँ ओ संविधानसभासँ बनल संविधान छलै, राजनीतिक दलसभक सहभागिता छल, संवैधानिक व्यवस्था अनुसार जनता आगाँ अर्पण करब हमर जिमेवारी आ दायित्व छल । ओइ समय हमर मनोभावना कहलक जे एतेक लाम्बा संघर्ष क हजारो जनता बलिदान कएने छैथ, नेपाली जनता अपन राजनीतिक अधिकार, आर्थिक अधिकार, सामाजिक न्यायके लेल संघर्ष कएने छै, तकर उपलब्धि जे दूटा संविधानसभासँ संविधान बनल अइछ, ओ तीन करोड़ नेपाली जनता आ मातृभूमि प्रति अर्पण करबाक जिमेवारी हमरा देलक, ओइ भावनाकेँ आत्मसात करैत लोकतन्त्रक मन्दिर संविधानसभाद्वारा प्रणाम करैत देशक मूल कानुन जनताकेँ अर्पण कएने छी, ओ हमर कर्तव्य छल ।

एखन जेनजी आन्दोलन बाद गणतान्त्रिक व्यवस्थामे जेहन अवस्था देखल गेल छै, अइसँ अहाँ कतेक सन्तुष्ट छी ?

गणतन्त्र स्थापना बाद ई १७–१८ सालक अवधिमे गणतन्त्रकेँ संस्थागत करबाक लेल कांग्रेस, एमाले, माओवादी, मधेशवादी दलसँ ल क आन राजनीतिक दलसभके योगदान अइछ । मुख्य योगदान नेपाली कांग्रेस, एमाले आ माओवादीके अइछ, तइयो जनतामे विश्वासक वातावरण नै बइन सकल, अइ बीचमे जे दलसभके सरकार बनलै, ओसभ जनताके विश्वास नै जीत सकल, चुनाव भ क लोकतान्त्रिक प्रणाली आगाँ बइढ़ रहल छलै मुदा जे शासन प्रशासनमे शुद्धता होबाक चाही, जनताक विश्वास आर्जन करबाक सन्दर्भमे कमी आएल । अइसँ युवासभमे समयसापेक्ष परिवर्तन, सुशासन, पारदर्शितामे कमजोरी देखलैन, भ्रष्टाचारक विरुद्धमे आवाज उठेलैन। आजुक डिजिटल दुनियाँमे सामाजिक सञ्जालक प्रभाव बढ़ैत अइछ, ओहिमे युवा पुस्ता अभ्यस्त भ रहल अइछ, ओइ युवा पुस्ताक लेल रोजगारीक वातावरण नै बइन सकल, युवासभ बाहर जाए लागल, व्यापार व्यवसायमे समस्या उत्पन्न भेल, देशमे काज करबाक वातावरणक सुनिश्चितताक लेल आवाज उठेलैन, परिवारमे शान्तिपूर्ण बैसबाक वातावरण नै बनल । अइ विभिन्न कारणसभसँ खास क युवा पुस्तामे आक्रोश उत्पन्न भेल । ओइ आक्रोशसँ आन्दोलन भेल । अइसँ ई सेहो देखाइत छै जे शासनसत्ता जनभावनाकेँ नै बुझत तँ एहन आन्दोलन आ उथलपुथल बीच-बीचमे होइत रहैत छे । जनता अपन अधिकार ताकैत छैथ, सरकार नै बुझत तँ परिवर्तनके आवज उठत ।

नेपाली जनताक पैघ संघर्ष आ बलिदानसँ गणतन्त्र प्राप्त भेल छै, एकरा आओर सुदृढ़ करबाक लेल सरकार आ राजनीतिक दलकेँ आब की करए पड़त ?

आइ हमसभ १९म गणतन्त्र दिवस मना रहल छी, ई नेपाली जनताक लेल सर्वाधिक महत्वके दिन अइछ, लोकतान्त्रिक गणतन्त्र संसारक उत्कृष्ट व्यवस्था अइछ । राष्ट्रपति, व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका लोकतन्त्रक महत्वपूर्ण अङ्गसभ छै, अइ मातहतके शासन प्रशासनमे सुधार करैत आगू बढ़लासँ मात्रे गणतन्त्र सुदृढ़ हएत ।

अन्तमे देशवासीकेँ किछु कहए चाहैत छी ?

हमरा जँका जेष्ठ नागरिक जे पचासौं साल लोकतन्त्रके लेल योगदान कएने अइछ, हमर शुभकामना अइछ, एखन जे निर्वाचित सरकार बनल छै, ई सरकार सेहो लोकतान्त्रिक गणतन्त्रकेँ संस्थागत करैत ल जाएत । अतीतमे जनताक भावना अनुसार शासनसत्ता सञ्चालन नै भेलासँ परिवर्तनक आवाज उठल छै, बहुदलीय व्यवस्थामे जनताक निर्णय शिरोधार्य होइत छै, संसदमे रहल दलसभ कार्यशैली सुधार करैत लोकतन्त्रकेँ संस्थागत नै क सकल तँ आन आन्दोलन भ सकैत अइछ । लोकतन्त्रक लेल एखनो नेपाली जनताकेँ आन आन्दोलन नै करए पड़ए सेहे हमर कामना अइछ । १९९७ सालमे योगदान केनिहार शहीद शुक्रराज शास्त्री, गङ्गालाल श्रेष्ठ, धर्मभक्त माथेमा आ दशरथ चन्दक योगदानकेँ स्मरण करैत हुनकासभके हार्दिक श्रद्धाञ्जलि व्यक्त करए चाहैत छी । तकर बाद २००७, २०१७, २०३६, २०४६, २०६२/६३ सालक आन्दोलन आ पछिला बेरक जेनजी आन्दोलनक क्रममे बलिदान देनिहारसभ प्रति श्रद्धासुमन अर्पण करए चाहैत छी । (रासस)

ताजा खबर
लोकप्रिय